दिनान्तवेलाय़ शेषेर फसल
Dinantobelay sheser phasol
प्रेम
दिनान्तवेलाय़ शेषेर फसल दिलेम
तरी-’परे,
ए पारे कृषि हल सारा,
याव ओ पारेर घाटे॥
हंसवलाका उड़े याय़
दूरेर तीरे, तारार आलोय़,
तारि डानार ध्वनि वाजे मोर अन्तरे।
भाँटार नदी धाय़ सागर-पाने कलताने,
भावना मोर भेसे याय़ तारि टाने॥
या-किछ निय़े चलि शेष सञ्चय़
सुख नय़ से, दुःख से
नय़, नय़ से कामना–
शुनि शुधु माझिर गान आर दाँड़ेर ध्वनि ताहार स्वरे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Dinantobelaay sheser phasol nilem tori-pore, E paare krishi holo saara, Jaabo o paarer ghaate. Hansobalaka ure jaay Durer tire, taarar aaloy, Taari daanar dhwoni baaje mor antore. Bhnaatar nodi dhaay saagor-paane kalotane, Bhaabna mor bhese jaay taari taane. Jaa-kichu niye choli shesh sanchoy Sukh noi se, dukkho se noi, noi se kamona - Shuni shudhu maajhir gaan aar dnaarer dhwoni taahar sware.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1929(১৩৩৬)
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