दीप निवे गेछे मम निशीथसमीरे
Dip nibe gechhe mamo
प्रेम
दीप निवे गेछे मम निशीथसमीरे,
धीरे धीरे एसे तुमि येय़ो ना गो फिरे॥
ए पथे यखन
यावे आँधारे चिनिते पावे–
रजनीगन्धार गन्ध भरेछे मन्दिरे॥
आमारे पड़िवे मने कखन से लागि
प्रहरे प्रहरे आमि गान गेय़े जागि।
भय़ पाछे शेष राते घुम आसे आँखिपाते,
क्लान्त कन्ठे मोर सुर फुराय़ यदि रे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Dip nibe gechhe mamo nishithosomire, Dhire dhire ese tumi jeyo na go phire. E pathe jakhon jabe aandhare chinite paabe - Rajonigandhar gandho bhorechhe mondire. Aamare poribe mone kakhon se laagi Prohare prohare aami gaan geye jaagi. Bhoy paachhe shesh raate ghum aase aankhipaate, Klaanto kanthe mor sur phuray jodi re.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1921(১৩২৮)
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