दाँड़ाओ, माथा खाओ, येय़ो ना सखा
Darao matha khao
प्रेम और प्रकृति
दाँड़ाओ, माथा खाओ, येय़ो ना सखा। शुधु सखा, फिरे चाओ, अधिक किछु नय़– कतदिन परे आजि पेय़ेछि देखा॥ आर तो चाहि ने किछु, किछु ना, किछु ना– शुधु ओइ मुखखानि जन्मशोध देखिव। ताओ कि हवे ना गो, सखा गो! शुधु एकवार फिरे चाओ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Dnaarao, maatha khaao, jeyo na sakha. Shudhu sakha, phire chaao, odhik kichhu noy - Katodin pore aaji peyechhi dekha. Aar to chaahine kichhu, kichhu na, kichhu na - Shudhu oi mukhokhaani janmoshodh dekhibo. Taao ki habe na go, sakha go ! Shudhu ekbar phire chaao.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रेम और प्रकृति · 47(প্রেম ও প্রকৃতি)
- राग
- देश(দেশ)
- ताल
- त्रिताल(ত্রিতাল)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- संकलन
- रबिच्छ्या(রবিচ্ছায়া)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ३२(স্বরবিতান ৩২)
- स्वरलिपि
- ज्योतिरिन्द्रनाथ ठाकुर
ज्योतिरिन्द्रनाथ ठाकुर1849–1925Rabindranath's elder brother — playwright, composer and painter, a pioneer of written notation for Bengali song, and a formative presence in the young poet's life.Photographer unknown, before 1925 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1885(১২৯২)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।