दुःख यदि ना पावे तो
Dukkha jodi na pabe
पूजा
२०४
दुःख यदि ना पावे तो दुःख तोमार घुचवे कवे?
विषके विषेर दाह दिय़े दहन करे मारते हवे॥
ज्वलते दे तोर आगुनटारे, भय़ किछु ना करिस तारे,
छाइ हय़े से निभवे यखन ज्वलवे ना आर कभु तवे॥
एड़िय़े ताँरे पालास ना रे, धरा दिते होस ना कातर।
दीर्घ पथे छुटे छुटे दीर्घ करिस दुःखटा तोर।
मरते मरते मरणटारे शेष क’रे दे एकेवारे,
तार परे सेइ जीवन एसे आपन आसन आपनि लवे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Dukkho jodi naa paabe to dukkho tomar ghuchbe kabe ? Bishke bisher daaho diye dahan kore maarte habe. Jwolte je tor aaguntaare, bhoy kichhu naa koris taare, Chhaai hoye se nibhbe jakhon jwolbe naa aar kobhu tabe. Eriye taare paalas naa re, dhara dite hos naa kaator. Dirgho pathe chhute chhute dirgho koris dukkhota tor. Morte morte marontare shesh kore de ekebare, Taar pare sei jiban ese aapon aason aapni labe.
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- पर्याय
- पूजा · 204(পূজা)
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- गीतालि(গীতালি)
- स्थान
- शांतिनिकेतन(শান্তিনিকেতন)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन ४२ (अरुप्रतन्)(স্বরবিতান ৪২ (অরূপরতন))
- स्वरलिपि
- सुधीर चंद्र करसुधीर चंद्र कर1906–1977Rabindranath's personal scribe in his last years: when illness kept the poet from writing, he dictated and Sudhirchandra set it down.
- रचनाकाल
- 17 September 1914(১ আশ্বিন ১৩২১)
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