ए दिन आजि कोन् घरे गो
E din aji kon ghore
पूजा
३१०
ए दिन आजि कोन् घरे गो खुले दिल द्वार?
आजि प्राते सूर्य ओठा सफल हल कार?।
काहार अभिषेकेर
तरे सोनार घटे आलोक भरे,
ऊषा काहार आशिस वहि हल आँधार पार?।
वने वने फुल फुटेछे, दोले नवीन पाता–
कार हृदय़ेर माझे हल तादेर माला गाँथा?
वहु युगेर
उपहारे वरण करि निल कारे,
कार जीवने प्रभात आजि घुचाय़ अन्धकार। यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
E din aaji kon ghore go khule dilo dwaar ? Aaji praate suryo ottha saphal holo kaar ? Kaahar obhisheker tare sonar ghate aalok bhare, Usha kaahar aashish bohi holo aandhar paar ? Bone bone phul phutechhe, dole nobin paata - Kaar hridayer maajhe holo taader maala gnaatha ? Bohu juger upohare baron kori nilo kaare, Kaar jibane probhat aaji ghuchay andhokar ?
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- पूजा · 310(পূজা)
- उप-पर्याय
- आनोन्दो(আনোন্দো)
- राग
- बौल्-सुर(বাউল-সুর)
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- शास्त्रीय और क्षेत्रीय रूप(শাস্ত্রীয় ও আঞ্চলিক রূপ)
- संकलन
- गीतालि(গীতালি)
- स्थान
- बोधगया(বুদ্ধগয়া)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ४४(স্বরবিতান ৪৪)
- स्वरलिपि
- सुधीर चंद्र करसुधीर चंद्र कर1906–1977Rabindranath's personal scribe in his last years: when illness kept the poet from writing, he dictated and Sudhirchandra set it down.
- रचनाकाल
- 9 October 1914(২৩ আশ্বিন ১৩২১)
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