ए की हरष हेरि कानने
E ki harosh heri
प्रेम और प्रकृति
ए की हरष हेरि कानने!
परान आकुल, स्वपन
विकशित मोहमदिरामय़ नय़ने॥
फुले फुले करिछे
कोलाकुलि, वने वने वहिछे समीरण
नवपल्लवे हिल्लोल
तुलिय़े– वसन्तपरशे वन शिहरे।
की जानि कोथा परान
मन धाइछे वसन्तसमीरणे॥
फुलेते शुय़े
जोछना हासिते हासि मिलाइछे।
मेघ घुमाय़े घुमाय़े
भेसे याय़ घुमभारे अलसा वसुन्धरा–
दूरे पापिय़ा पिउ-पिउ
रवे डाकिछे सघने॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
E ki harosh heri kaanone ! Paran aakul swapon bikoshito mohomodiramoy nayone. Phule phule korichhe kolakuli bone bone bohichhe somiran Nabopallabe hillol tuliye - basontoparoshe bono shihare. Ki jaani kotha parano mon dhaayichhe basontosomirane. Phulete shuye jochhona haasite haasi milayichhe. Megh ghumaye ghumaye bhese jaay ghumobhaare alosa bosundhara - Dure paapiya piyu piyu rabe daakichhe saghane.
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- प्रेम और प्रकृति · 15(প্রেম ও প্রকৃতি)
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इंदिरा देवी चौधरनी1873–1960Rabindranath's niece — scholar, translator and musician, who set down a great many of his songs in notation.Photographer unknown, c. 1890 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1885(১২৯২)
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