एवार, सखी, सोनार मृग
Ebar sokhi sonar mrigo
प्रेम
एवार, सखी, सोनार मृग देय़ वुझि
देय़ धरा।
आय़ गो तोरा पुराङ्गना, आय़ सवे
आय़ त्वरा॥
छुटेछिल पिय़ास-भरे मरीचिकावारिर तरे,
ध’रे तारे कोमल करे कठिन फाँसि परा॥
दय़ामाय़ा करिस ने गो, ओदेर नय़ से
धारा।
दय़ार दोहाइ मानवे ना गो एकटु
पेलेइ छाड़ा।
वाँधन-काटा वन्यटाके माय़ार फाँदे फेलाओ पाके,
भुलाओ ताके वाँशिर डाके, वुद्धिविचार-हरा॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ebaar, sokhi, sonar mrigo dey bujhi dey dhara. Aay go tora purangana, aay sobe aay twara. Chhutechhilo piyas bhore morichikabaarir tore, Dhore taare komol kore kotthin phnaasi para. Dayamaaya koris ne go, oder noy se dhaara. Dayar dohai maanbe naa go ektu pelei chhara. Bnaadhon-kaata bonyotaake maayar phnaade phelao paake, Bhulao taake bnaashir daake, budhibichar-hara.
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- अनादिकुमार दस्तिदारअनादिकुमार दस्तिदार1903–1974Singer and teacher, and one of the notable propagators of Rabindrasangeet.
- रचनाकाल
- 1903(১৩১০)
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