एइ कथाटाइ छिलेम भुले
Ei kothatai chhilem bhule
प्रकृति
एइ कथाटाइ छिलेम भुले–
मिलव आवार सवार साथे
फाल्गुनेर एइ फुले फुले॥
अशोकवने आमार हिय़ा
नतुन पाताय़ उठवे जिय़ा,
वुकेर मातन टुटवे
वाँधन यौवनेरइ कूले कूले
फाल्गुनेर एइ फुले फुले॥
वाँशिते गान उठवे पूरे
नवीन-रविर-वाणी-भरा
आकाशवीणार सोनार सुरे।
आमार मनेर सकल कोणे
भरवे गगन आलोक-धने,
कान्नाहासिर वन्यारइ
नीर उठवे आवार दुले दुले
फाल्गुनेर एइ फुले फुले॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ei kathatai chhilem bhule - Milbo aabar sabar saathe phalgunero ei phule phule. Ashok bone aamar hiya ogo nutan paatay utthbe jiya, Buker maaton tutbe bnaadhon jouboneri kule kule Phaalgunero ei phule phule. Bnaashite gaan utthbe pure Nobin-robir-baani-bhara aakashbinar sonar sure. Aamar moner sakol kone ogo bhorbe gagon aalok dhane, Kaannahaasir bonyari nir utthbe aabar dule dule Phaalguner ei phule phule.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 25 February 1915(১৩ ফাল্গুন ১৩২১)
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