एखन आर देरि नय़
Ekhon ar deri noy
स्वदेश
एखन आर देरि नय़, धर् गो तोरा हाते हाते धर् गो। आज आपन पथे फिरते हवे सामने मिलन -स्वर्ग॥ ओरे, ओइ उठेछे शङ्ख वेजे, खुलल दुय़ार मन्दिरे ये— लग्न वय़े याय़ पाछे, भाइ, कोथाय़ पूजार अर्घ्य?। एखन यार या-किछु आछे घरे साजा पूजार थालार ’परे, आत्मदानेर उৎसधाराय़ मङ्गलघट भर् गो। आज नितेओ हवे, आज दितेओ हवे, देरि केन करिस तवे— वाँचते यदि हय़ वेँचे ने, मर्ते हय़ तो मर् गो॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ekhon aar deri noy dhor go tora haate haate dhor go. Aaj aapon pathe phirte hobe, saamne milon-swargo. Ore, oi utthechhe shankho beje, khullo duwar mondire je - Lagno boye jaay paachhe bhaai, kothay pujar argho ? Ekhon jaar jaa kichhu aachhe ghore saaja pujar thaalar pore, Aatmodaaner utsodhaaray mongolghot bhor go. Aaj niteo hobe, aaj diteo hobe, deri keno koris tobe - Bnaachte jodi hoy bneche ne, morte hoy to mor go.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1905(১৩১২)
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