एकटुकु छोँओय़ा लागे
Ektuku chhoa lage
प्रकृति
एकटुकु छोँओय़ा लागे, एकटुकु कथा शुनि–
ताइ दिय़े मने मने रचि मम फाल्गुनी॥
किछु पलाशेर
नेशा, किछु वा चाँपाय़ मेशा,
ताइ दिय़े सुरे सुरे रङे रसे जाल
वुनि॥
येटुकु काछेते आसे क्षणिकेर फाँके फाँके
चकित मनेर कोणे स्वपनेर छवि आँके।
येटुकु याय़ रे
दूरे भावना काँपाय़ सुरे,
ताइ निय़े याय़ वेला नूपुरेर ताल
गुनि॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ektuku chnowa laage ektuku kotha shuni - Taai diye mone mone rochi mamo phaalguni. Kichhu palasher nesha, kichhu ba chnaapay mesha, Taai diye sure sure range rase jaal buni. Jetuku kaachhete aase khoniker phnaake phnaake Chokito moner kone swaponer chhobi aanke. Jetuku jaay je dure bhaabna knaapay sure, Taai niye jaay bela nupurer taal guni.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 13 February 1928(১ ফাল্গুন ১৩৩৪)
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