एनेछ ओइ शिरीष वकुल आमेर मुकुल
Enechho oi sirish bokul
प्रकृति
एनेछ ओइ शिरीष वकुल आमेर मुकुल साजिखानि हाते करे।
कवे ये सव फुरिय़े देवे, चले यावे दिगन्तरे॥
पथिक, तोमाय़ आछे
जाना, करव ना गो तोमाय़ माना–
यावार वेलाय़ येय़ो येय़ो विजय़माला माथाय़
प’रे॥
तवु तुमि आछ यतक्षण
असीम हय़े ओठे हिय़ाय़ तोमारि मिलन।
यखन यावे तखन प्राणे विरह मोर
भरवे गाने–
दूरेर कथा सुरे वाजे सकल वेला व्यथाय़ भ’रे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Enechho oi shirish bokul aamero mukul saajikhani haate kore. Kabe je sab phuriye debe, chole jaabe digantare. Pothik, tomay aachhe jaana, korbo na go tomay maana - Jaabar belay jeyo jeyo bijaymaala maathay pore. Tobu tumi aachho jatokkhon Asim hoye otthe hiyay tomari milan. Jakhon jaabe takhon praane biraho mor bhorbe gaane - Durer katha sure baaje sakol bela byathay bhore.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1922(১৩২৯)
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