एरे भिखारि साजाय़े की रङ्ग तुमि करिले
Ere bhikhari sajaye
पूजा
एरे भिखारि साजाय़े की रङ्ग तुमि करिले, हासिते आकाश भरिले॥ पथे पथे फेरे, द्वारे द्वारे याय़, झुलि भरि राखे याहा-किछु पाय़– कतवार तुमि पथे एसे, हाय़, भिक्षार धन हरिले॥ भेवेछिल चिर-काङाल से एइ भुवने, काङाल मरणे जीवने। ओगो महाराजा, वड़ो भय़े भय़े दिनशेषे एल तोमारि आलय़े– आधेक आसने तारे डेके लय़े निज माला दिय़े वरिले॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ere bhikhari saajaye ki rango tumi korile, Haasite aakash bhorile. Pathe pathe phere, dwaare dwaare jaay, jhuli bhori raakhe jaaha-kichhu paay - Katobar tumi pathe ese, haay, bhikkhar dhan horile. Bhebechhilo chiro-kaangal se ei bhubane, kaangal marone jibane. Ogo maharaaja, baro bhoye bhoye dinosheshe elo tomari aaloye - Aadhek aasone taare deke loye nijo maala diye borile.
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- स्थान
- रामगढ़, हिमालय(রামগড়, হিমালয়)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ४०(স্বরবিতান ৪০)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 19 May 1914(৫ জ্যৈষ্ঠ ১৩২১)
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