एसेछिनु द्वारे तव श्रावणराते
Esechhinu dware tabo
प्रकृति
एसेछिनु द्वारे तव श्रावणराते, प्रदीप निभाले केन अञ्चलघाते॥ अन्तरे कालो छाय़ा पड़े आँका, विमुख मुखेर छवि मने रय़ ढाका, दुःखेर साथि तारा फिरिछे साथे॥ केन दिले ना माधुरीकणा, हाय़ रे कृपणा। लावण्यलक्ष्मी विराजे भुवनमाझे, तारि लिपि दिले ना हाते॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Esechhinu dwaare tabo shrabonoraate, Prodip nibhale keno aanchaloghaate. Aantore kaalo chhaaya pare aanka Bimukh mukher chobi mone roy dhaaka. Dukhher saathi taara phirichhe saathe. Keno dile na maadhurikona, haay re kripona. Laabonyolokkhi biraje bhubanomaajhe, Taari lipi dile na haate.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1939(১৩৪৬)
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