गुरु गुरु गुरु गुरु घन मेघ गरजे पर्वतशिखरे,
Guru guru ghano megh
चित्रांगदा Chitrangada से · दृश्य 1
गुरु गुरु गुरु गुरु घन मेघ गरजे पर्वतशिखरे, अरण्ये तमश्छाय়ा । मुखर निर्झर-कलकल्लोले व्याधेर चरणध्वनि शुनिते ना पाय় भीरु हरिणदम्पति । चित्रव्याघ्र पदनखचिह्नरेखाश्रेणी रेखे गेछे ओइ पथपङ्क-'परे, दिय়े गेछे पदे पदे गुहार सन्धान ।
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Guru guru guru guru ghano megho garoje parbotoshikhare, Aronye tomochhaaya. Mukharo nirjhorokalokallole Byadhero charono dhwoni shunite na paay bhiru Horinodampoti. Chitrobyaghro padonokhachinhorekhashreni Rekhe gechhe oi pathopanko-pore, Diye gechhe pade pade guhar sandhan.
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- पर्याय
- चित्रांगदा(চিত্রাঙ্গদা)
- राग
- गौद्-मल्हर(গৌড়-মল্হার)
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- कहर्व(কাহারবা)
- संकलन
- चित्रांगदा(চিত্রাঙ্গদা)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन १७ (चित्रन्गद)(স্বরবিতান ১৭ (চিত্রাঙ্গদা))
- स्वरलिपि
- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1936(১৩৪৩)
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