हे माधवी, द्विधा केन
He madhobi didha keno
प्रकृति
हे माधवी, द्विधा केन, आसिवे कि
फिरिवे कि–
आङिनाते वाहिरिते मन केन गेल
ठेकि॥
वातासे लुकाय़े
थेके के ये तोरे गेछे डेके,
पाताय़ पाताय़ तोरे पत्र से ये
गेछे लेखि॥
कखन् दखिन हते के दिल दुय़ार
ठेलि,
चमकि उठिल जागि चामेलि नय़न मेलि।
वकुल पेय़ेछे
छाड़ा, करवी दिय़ेछे साड़ा,
शिरीष शिहरि उठे दूर हते कारे
देखि॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Hey maadhobi, dwidha keno, aasibe ki phiribe ki - Aanginate baahirite mon keno gelo ttheki. Baatase lukaye theke ke je tore gechhe deke, Paatay paatay tore patro se je gechhe lekhi. Kakhon dokhin hote ke dilo duwar ttheli, Chamoki utthilo jaagi chameli nayon meli. Bokul peyechhe chhaara, karobi diyechhe saara, Shirish shihori utthe dur hote kaare dekhi.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 13 February 1928(১ ফাল্গুন ১৩৩৪)
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