हृदय़े छिले जेगे
Hridoye chhile jege
प्रकृति
हृदय़े छिले जेगे,
देखि
आज शरत-मेघे॥
केमने आजके भोरे गेल गो गेल सरे
तोमार ओइ आँचलखानि शिशिरेर छोँओय़ा लेगे॥
की-ये
गान गाहिते चाइ,
वाणी
मोर खुँजे ना पाइ।
से ये ओइ शिउलिदले
छड़ालो काननतले,
से ये ओइ क्षणिक धाराय़ उड़े
याय़ वाय़ुवेगे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Hridaye chhile jege, Dekhi aaj sharotomeghe. Kemone aajke bhore gelo go gelo sore Tomar oi aancholkhaani shishirer chhnowa lege. Ki je gaan gaahite chaai, Baani mor khnuje na paai. Se je oi shiulidale chhaaralo kaanonotale, Se je oi khoniko dhaaray ure jaay baayubege.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 24 September 1921(৮ আশ্বিন ১৩২৮)
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