या हारिय़े याय़ ता आगले व’से
Ja hariye jay
पूजा
२३९
या हारिय़े याय़ ता आगले व’से रइव कत आर?
आर पारि ने रात जागते, हे नाथ, भावते अनिवार॥
आछि रात्रि दिवस ध’रे दुय़ार आमार वन्ध क’रे,
आसते ये चाय़ सन्देहे ताय़ ताड़ाइ वारे वार॥
ताइ तो कारो हय़ ना आसा आमार एका घरे।
आनन्दमय़ भुवन तोमार वाइरे खेला करे॥
तुमिओ वुझि पथ नाहि पाओ, एसे एसे फिरिय़ा याओ–
राखते या चाइ रय़ ना ताओ, धुलाय़ एकाकार॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Jaa haariye jaay taa aagle bose roibo kato aar. Aar paari ne raat jaagte, hey naath, bhaabte anibaar. Aachhi raatri-dibosh dhore duyar aamar bandho kore, Aaste je chaay sandehe taay taarai baare baar. Taai to kaaro hoy na aasa aamar eka ghore. Aanondomoy bhuban tomar baaire khela kore. Tumio bujhi poth naahi paao, ese ese phiriya jaao - Raakhte jaa chaai roy naa taao, dhulay ekaakar.
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 - रचनाकाल
- 17 September 1909(১ আশ্বিন ১৩১৬)
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