जाग’ जाग’ रे जाग’ सङ्गीत
Jago jago re jago
पूजा
जाग' जाग' रे जाग' सङ्गीत–चित्त अम्वर कर तरङ्गित निविड़नन्दित प्रेमकम्पित हृदय़कुञ्जविताने॥ मुक्तवन्धन सप्तसुर तव करुक विश्वविहार, सूर्यशशिनक्षत्रलोके करुक हर्ष प्रचार। ताने ताने प्राणे प्राणे गाँथ' नन्दनहार। पूर्ण कर' रे गगन-अङ्गन ताँर वन्दनगाने॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Jaago jaago re jaago sangeeto - chitto ambaro karo tarongito, Nibironondito premokompito hridayokunjobitaane. Muktobandhano saptosuro tabo koruko bishwobihar, Surjoshoshinokkhotroloke koruko harsho prochaar. Taane taane praane praane gnaatho nandanohaar. Purno karo re gagon angono tnaar bandonogaane.
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 - रचनाकाल
- 1909(১৩১৬)
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