याय़ दिन, श्रावणदिन याय़
Jay din shrabanodin
प्रकृति
याय़ दिन, श्रावणदिन याय़। आँधारिल मन मोर आशङ्काय़, मिलनेर वृथा प्रत्याशाय़ माय़ाविनी एइ सन्ध्या छलिछे॥ आसन्न निर्जन राति, हाय़, मम पथ-चाओय़ा वाति व्याकुलिछे शून्येरे कोन् प्रश्ने॥ दिके दिके कोथाओ नाहि साड़ा, फिरे ख्यापा हाओय़ा गृहछाड़ा। निविड़-तमिस्र-विलुप्त-आशा व्यथिता यामिनी खोँजे भाषा– वृष्टिमुखरित मर्मरछन्दे, सिक्त मालतीगन्धे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Jaay din shrabonodin jaay. Aandharilo mon mor aashongkaay, Miloner britha prottashay maayabini ei sondhya chholichhe. Aasanno nirjano raati haay mamo path-chaawa baati Byakulichhe shunyere kon proshne. Dike dike kothao naahi saara, Phire khyapa haawa grigochhara. Nibiro-tamisro-bilupto-aasha byathito jaamini khnoje bhaasha - Bristimukhorito marmarochhande sikto maalotigandhe.
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शांतिदेव घोष1910–1999An ashramite of Santiniketan who learnt his songs from Rabindranath himself and travelled with him to Sri Lanka, Java and Bali. Singer, dancer, actor, author and long-serving teacher at Sangit Bhavana.Photographer unknown, 1980 · Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0 - रचनाकाल
- 1938(১৩৪৫)
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