যখন তোমায় আঘাত করি
Jakhon tomay aghat kori
Puja
२०३
यखन तोमाय़ आघात करि तखन चिनि।
शत्रु हय़े दाँड़ाइ यखन लओ ये जिनि॥
ए प्राण यत निजेर तरे तोमारि धन हरण करे
ततइ शुधु तोमार काछे हय़ से ऋणी॥
उजिय़े येते चाइ यतवार गर्वसुखे
तोमार स्रोतेर प्रवल परश पाइ ये वुके।
आलो यखन आलस-भरे निविय़े फेलि आपन घरे
लक्ष तारा ज्वालाय़ तोमार निशीथिनी॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Jakhon tomay aaghat kori takhon chini. Shotru hoye dnaarai jakhon, lawo je jini. E praan jato nijer tare tomari dhan haron kare Tatoi shudhu tomar kaachhe hoy se rini. Ujiye jete chaai jatobar garbosukhe, Tomar sroter probal parosh paai je buke. Aalo jakhon aalosbhore nibiye pheli aapon ghore Lokkho taara jwaalay tomar nishithini.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Puja · 203(পূজা)
- उप-पर्याय
- Dukkha
- राग
- Baul-Sur
- ताल
- Dadra(দাদরা)
- संकलन
- Geetali
- स्थान
- Allahabad
- स्वरबितान खण्ड
- 42 (Arupratan)
- स्वरलिपि
- Sudhir Chandra Kar
- रचनाकाल
- 18 October 1914(১ কার্তিক ১৩২১)
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