যতবার আলো জ্বালাতে চাই
Jatobar alo jalate chai
Puja
यतवार आलो ज्वालाते चाइ, निवे याय़ वारे वारे।
आमार जीवने तोमार आसन गभीर अन्धकारे॥
ये लताटि आछे शुकाय़ेछे मूल–कुँड़ि धरे शुधु, नाहि फोटे फुल,
आमार जीवने तव सेवा ताइ वेदनार उपहारे॥
पूजागौरव पुण्यविभव किछु नाहि, नाहि लेश–
ए तव पूजारी परिय़ा एसेछे लज्जार दीन वेश।
उৎसवे तार आसे नाइ केह, वाजे नाइ वाँशि, साजे नाइ गेह–
काँदिय़ा तोमाय़ एनेछे डाकिय़ा भाङामन्दिर-द्वारे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Jatobaar aalo jwaalate chaai, Nibe jaay baare baare Aamar jibane tomar aason Gobhir andhakare. Je lataati aachhe shukaayechhe mul Knuri dhore shudhu, naahi phote phul, Aamar jibane tabo seba taai Bedonaar upahaare. Pujagourab punyobibhab Kichhu naahi, naahi lesh, E tabo pujaari poriya esechhe Lajjaar dino besh. Utsabe taar aase naai keho, Baaje naai bnaashi, saaje naai geho - Kaadia tomaay enechhe daakiya Bhaanga mondir-dwaare.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Puja · 165(পূজা)
- उप-पर्याय
- Biraha
- राग
- Kamod
- ताल
- Ektaal(একতাল)
- घराना
- Hindustani
- संकलन
- Geetanjali
- प्रकाशित
- Bangadarshan
- स्थान
- Tindhariya
- स्वरबितान खण्ड
- 38
- स्वरलिपि
- Surendranath Bandopadhyay / Bhimrao Shastri
- रचनाकाल
- 4 June 1910(২১ জ্যৈষ্ঠ ১৩১৭)
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