यतवार आलो ज्वालाते चाइ
Jatobar alo jalate chai
पूजा
यतवार आलो ज्वालाते चाइ, निवे याय़ वारे वारे।
आमार जीवने तोमार आसन गभीर अन्धकारे॥
ये लताटि आछे शुकाय़ेछे मूल–कुँड़ि धरे शुधु, नाहि फोटे फुल,
आमार जीवने तव सेवा ताइ वेदनार उपहारे॥
पूजागौरव पुण्यविभव किछु नाहि, नाहि लेश–
ए तव पूजारी परिय़ा एसेछे लज्जार दीन वेश।
उৎसवे तार आसे नाइ केह, वाजे नाइ वाँशि, साजे नाइ गेह–
काँदिय़ा तोमाय़ एनेछे डाकिय़ा भाङामन्दिर-द्वारे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Jatobaar aalo jwaalate chaai, Nibe jaay baare baare Aamar jibane tomar aason Gobhir andhakare. Je lataati aachhe shukaayechhe mul Knuri dhore shudhu, naahi phote phul, Aamar jibane tabo seba taai Bedonaar upahaare. Pujagourab punyobibhab Kichhu naahi, naahi lesh, E tabo pujaari poriya esechhe Lajjaar dino besh. Utsabe taar aase naai keho, Baaje naai bnaashi, saaje naai geho - Kaadia tomaay enechhe daakiya Bhaanga mondir-dwaare.
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- सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय
सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 / भीमराव शास्त्री - रचनाकाल
- 4 June 1910(২১ জ্যৈষ্ঠ ১৩১৭)
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