ये ध्रुवपद दिय़ेछ वाँधि
Je dhrubopado diyechho
पूजा
३३५
ये ध्रुवपद दिय़ेछ वाँधि विश्वताने
मिलाव ताइ जीवनगाने॥
गगने तव विमल नील–हृदय़े लव ताहारि मिल,
शान्तिमय़ी गभीर वाणी नीरव प्राणे॥
वाजाय़ ऊषा निशीथकूले ये गीतभाषा
से
ध्वनि निय़े जागिवे मोर नवीन आशा।
फुलेर मतो सहज सुरे प्रभात मोर उठिवे पूरे,
सन्ध्या मम से सुरे येन मरिते जाने॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Je dhrubopado diyechho bnaadhi bishwotaane Milabo taai jibanogaane. Gagone tabo bimalo nil - hridaye labo taahari mil, Shaantimoyi gobhir baani nirabo praane. Baajay usha nishithokule je gitobhaasha Se dhwoni niye jaagibe mor nobino aasha. Phuler mato sahojo sure probhat mamo utthibe pure, Sondha mamo se sure jeno morite jaane.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 15 January 1928(২ মাঘ ১৩৩৪)
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