যে দিন ফুটল কমল
Je din phutlo kamol
Puja
ये दिन फुटल कमल किछुइ जानि नाइ,
आमि छिलेम अन्यमने।
आमार साजिय़े साजि तारे आनि नाइ,
से ये रइल सङ्गोपने॥
माझे माझे हिय़ा आकुलप्राय़
स्वपन देखे चमके ऊठे चाय़,
मन्द मधुर गन्ध आसे हाय़
कोथाय़ दखिन-समीरणे॥
ओगो, सेइ सुगन्धे फिराय़ उदासिय़ा
आमाय़ देशे-देशान्ते।
येन सन्धाने तार उठे निश्वासिय़ा
भुवन नवीन-वसन्ते।
के जानित दूरे तो नेइ से,
आमारि गो आमारि सेइ ये,
ए माधुरी फुटेछे हाय़ रे
आमार हृदय़-उपवने॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Je din phutlo kamal kichhui jaani naai, Aami chhilem onyomone. Aamar saajiye saaji taare aani naai, Se je roilo sangopane. Maajhe maajhe hiya aakulpraay, Swapon dekhe chamake utthe chaay, Mando modhur gandho aase haay Kothaay dokhin samirane. Ogo sei sugandhe phiray udaasiya Aamay deshe deshante. Jeno sandhaane taar utthe nishwasiya Bhuban nobin basonte. Ke jaanito dure to nei se, Aamaari go aamari sei je, E maadhuri phutechhe haay re Aamar hridoy-upobone.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Puja · 137(পূজা)
- उप-पर्याय
- Biraha
- ताल
- Teyora(তেওরা)
- घराना
- Hindustani
- संकलन
- Geetimalya
- स्थान
- Shilaidaha
- स्वरबितान खण्ड
- 41
- स्वरलिपि
- Bhimrao Shastri
- रचनाकाल
- 9 April 1912(২৬ চৈত্র ১৩১৮)
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