झरो-झरो झरो-झरो झरे रङेर झर्ना
Jharo jharo jhare ranger
प्रकृति
झरो-झरो झरो-झरो झरे
रङेर झर्ना।
आ य़ आ य़ आ य़ आय़ से
रसेर सुधाय़ हृदय़ भर्-ना॥
सेइ मुक्त वन्याधाराय़ धाराय़ चित्त
मृत्यु-आवेश हाराय़,
ओ सेइ रसेर
परश पेय़े धरा नित्यनवीनवर्णा॥
तार कलध्वनि दखिन-हाओय़ाय़ छड़ाय़ गगनमय़,
मर्मरिय़ा आसे छुटे
नवीन किशलय़।
वनेर वीणाय़ वीणाय़ छन्द जागे वसन्तपञ्चमेर
रागे–
ओ सेइ सुरे सुरे सुर मिलिय़े आनन्दगान धर्-ना॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Jharo-jharo jharo-jharo jhare ranger jharna. Aay aay aay aay se raser sudhay hriday bhar-na. Sei mukto bonnadhaaray dhaaray chitto mrittu-aabesh haaray, O sei raser paros peye dhora nittonobinobarna. Taar kalodhwani dokhin-haaway chharay gagonmoy, Marmoria aase chute nobin kisholay. Boner binay binay chhando jaage basontopanchomer raage - O sei sure sure sur miliye aanondogaan dhar-na.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1922(১৩২৯)
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