जय़ होक, जय़ होक नव अरुणोदय़
Joy hok joy hok
पूजा
जय़
होक, जय़ होक नव अरुणोदय़।
पूर्वदिगञ्चल होक ज्योतिर्मय़॥
एसो अपराजित वाणी, असत्य हानि–
अपहत शङ्का, अपगत संशय़॥
एसो नवजाग्रत प्राण, चिरयौवनजय़गान।
एसो मृत्युञ्जय़ आशा जड़त्वनाशा–
त्रन्दन
दूर होक, वन्धन होक क्षय़॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Joy hok, joy hok nabo orunodoy. Purbodiganchalo hok jyortirmoy. Eso aparaajito baani, asotyo haani - Apohato sanka apogato sangshoy. Eso nabojaagrotopraan, chirojoubano jayogaan. Eso mritunjoy aasha jarotyonaasha - Krandano dur hok, bandhano hok khoy.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1922(১৩২৯)
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