কাল সকালে উঠব মোরা
Kal sakale uthbo mora
Kaal Mrigaya Kaal Mrigaya से · दृश्य 1
काल सकाले उठव मोरा याव नदीर कूले— शिव गड়िय়े करव पुजो, आनव कुसुम तुले । मोरा भोरेर वेला गाँथव माला, दुलव से दोलाय়, वाजिय়े वाँशि गान गाहिव वकुलेर तलाय় । ना भाइ, काल सकाले माय়ेर काछे निय়े याव ध'रे, मा वलेछे ऋषिर साजे साजिय়े देवे तोरे ! सन्ध्या हय়े एल ये भाइ, एखन याइ फिरे— एकला आछेन अन्ध पिता आँधार कुटीरे ।
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Kaal sakale utthbo mora, Jaabo nodir kule, Shib goriye korbo pujo, Aanbo kusum tule. Mora bhorer belay gnaathbo maala, Dulbo se dolaay, Baajiye bnaashi gaan gaahibo Bokuler tolaay. Na bhaai, kaal sokale maayer kaachhe Niye jabo dhore, Maa bolechhe rishir saaje Sajiye debe tore. Sondhya hoye elo je bhaai, Ekhon jaai phire - Ekla aachhen andho pita Aandhar kutire.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Kaal Mrigaya(কালমৃগয়া)
- उप-पर्याय
- kaal-mrigaya
- ताल
- Khemta
- घराना
- Western
- संकलन
- Kaal-mrigaya
- स्वरबितान खण्ड
- 29
- स्वरलिपि
- Indira Debi Chowdhurani
- रचनाकाल
- 1882(১২৮৯)
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