काली काली काली वलो रे आज—
Kali kali balo re
वाल्मीकि प्रतिभा Valmiki Pratibha से · दृश्य 1
काली काली काली वलो रे आज— वलो हो, हो हो, वलो हो, वलो हो ! नामेर जोरे साधिव काज, वलो हो,हो,वलो हो, वलो हो ! ओइ घोर मत्त करे नृत्य रङ्ग माझारे, ओइ लक्ष लक्ष यक्ष रक्ष घेरि श्यामारे, ओइ लट्ट-पट्ट-केश अट्ट अट्ट हासे रे— हाहा हाहाहा हाहाहा ! आरे वल् रे श्यामा माय়ेर जय়,जय় जय় ! जय় जय়,जय় जय়,जय় जय়,जय় जय়, आरे वल् रे श्यामा माय়ेर जय়,जय় जय় ! आरे वल् रे श्यामा माय়ेर जय় !
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Kaali kaali balo re aaj - Balo ho, ho ho, balo ho, ho ho, balo ho. Naamer jore saadhibo kaaj - Balo ho ho ho, balo ho, balo ho. Oi ghor matto kare nrityo rango-maajhare, Oi lokkho lokkho jokkho rokkho gheri shyamare, Oi latto-patto-kesh, atto atto haase re - Haha hahaha hahaha. Aare bal re shyama maayer joy, joy joy. Joy joy, joy joy, joy joy, joy joy, Aare bal re shyama mayer joy, joy joy, Aare bal re shyama maayer joy.
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- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1880(১২৮৭)
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