खोलो खोलो द्वार, राखिय़ो ना आर
Kholo kholo dwar
प्रेम
खोलो खोलो द्वार, राखिय़ो ना आर वाहिरे आमाय़ दाँड़ाय़े। दाओ साड़ा दाओ, एइ दिके चाओ, एसो दुइ वाहु वाड़ाय़े॥ काज हय़े गेछे सारा उठेछे सन्ध्यातारा। आलोकेर खेय़ा हय़े गेल दे'य़ा अस्तसागर पाराय़े॥ भरि लय़े झारि एनेछ कि वारि, सेजेछ कि शुचि दुकूले। वेँधेछ कि चुल, तुलेछ कि फुल, गेँथेछ कि माला मुकुले। धेनु एल गोठे फिरे, पाखिरा एसेछे नीड़े, पथ छिल यत जुड़िय़ा जगत आँधारे गिय़ेछे हाराय़े॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Kholo kholo dwaar raakhiyo na aar Baahire aamay daaray. Daao saara daao, ei dike chaao, Eso dui baahu baaraye. Kaaj hoye gechhe saara, utthechhe sondhataara Aaloker kheya hoye gelo deya Astosaagar paaraye. Bhori loye jhaari enechho ki baari Sejechho ki suchi dukule. Bnedhechho ki chul, tulechho ki phool Gnethechho ki maala mukule. Dhenu elo gotthe phire, paakhira esechhe nire, Path chhilo jato juriya jagato Aandhare giyechhe haaraye.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रेम · 114(প্রেম)
- उप-पर्याय
- प्रेम्-बोइचित्र(প্রেম্-বোইচিত্র)
- राग
- इमन्-कल्यन(ইমন-কল্যাণ)
- ताल
- कहर्व(কাহারবা)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- संकलन
- राजा(রাজা)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन ४२ (अरुप्रतन्)(স্বরবিতান ৪২ (অরূপরতন))
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- January 1920(মাঘ ১৩২৬)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।