কী বেদনা মোর জানো সে কি তুমি
Ki bedona mor jano
Prem O Prakriti
की वेदना मोर जानो से कि तुमि जानो
ओगो
मिता, मोर अनेक दूरेर मिता।
आजि ए निविड़तिमिर यामिनी विद्युतसचकिता॥
वादल-वातास व्येपे हृदय़ उठिछे केँपे
ओगो से कि तुमि जानो।
उৎसुक एइ दुखजागरण ए कि हवे हाय़ वृथा॥
ओगो मिता, मोर अनेक दूरेर मिता,
आमार भवनद्वारे रोपण करिले यारे
सजल हाओय़ार करुण परशे से मालती विकशिता।
ओगो से कि तुमि जानो।
तुमि यार सुर दिय़ेछिले वाँधि
मोर कोले आज उठिछे से काँदि ओगो से कि जानो–
सेइ-ये तोमार वीणा से कि विस्मृता॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ki bedona mor jaano se ki tumi jaano Ogo mita, mor anek durer mita. Aaji e nibirotimir jaamini bidyutosachokitaa. Baadol baatas byepe hridoy utthichhe knepe Ogo se ki tumi jaano. Utsuk ei dukhojaagoran e ki hobe haay britha. Ogo mita, mor anek durer mita, Aamar bhabonodwaare ropan korile jaare Sajol haawar koruno paroshe se maaloti bikoshitaa. Ogo se ki tumi jaano. Tumi jaar sur diyechhile bnaadhi Mor kole aaj utthichhe se knaadi ogo se ki jaano - Sei-je tomar bina se ki bismritaa.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Prem O Prakriti · 87(প্রেম ও প্রকৃতি)
- राग
- Sohini
- ताल
- Dadra(দাদরা)
- घराना
- Hindustani
- संकलन
- Bithika
- स्थान
- Shantiniketan
- स्वरबितान खण्ड
- 54
- स्वरलिपि
- Shantideb Ghosh
- रचनाकाल
- 11 May 1928(১৩৩৫)
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