क्लान्त यखन आम्रकलिर काल
Klanto jakhon amrokolir
प्रकृति
क्लान्त यखन आम्रकलिर काल, माधवी झरिल भूमितले अवसन्न, सौरभधने तखन तुमि हे शालमञ्जरी वसन्ते कर धन्य॥ सान्त्वना मागि दाँड़ाय़ कुञ्जभूमि रिक्त वेलाय़ अञ्चल यवे शून्य– वनसभातले सवार ऊधेर्व तुमि, सव-अवसाने तोमार दानेर पुण्य॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Klaanto jakhon aamrokolir kaal, maadhobi jhorilo bhumitale aabosanno, Sourabhodhone takhono tumi hey shaalomanjori basonte karo dhonyo. Saantona maagi dnaaray kunjobhumi rikto belay anchal jabe shunyo - Bonosabhatale sabaaro urdhe tumi, sab-abosaane tomar daaner punyo.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1931(১৩৩৮)
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