कोन् पुरातन प्राणेर टाने
Kon puraton praner tane
प्रकृति
कोन् पुरातन प्राणेर टाने छुटेछे मन माटिर पाने॥ चोख डुवे याय़ नवीन घासे, भावना भासे पुव-वातासे– मल्लार गान प्लावन जागाय़ मनेर मध्ये श्रावण-गाने॥ लागल ये दोल वनेर माझे अङ्गे से मोर देय़ दोला ये। ये वाणी ओइ धानेर क्षेते आकुल हल अङ्कुरेते आज एइ मेघेर श्यामल माय़ाय़ सेइ वाणी मोर सुरे आने॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Kon puratan praaner taane Chhutechhe mon maatir paane. Chokh dube jaay nobin ghaase, bhaabona bhaase pub-baatase - Mallargaan plaabon jaagay moner modhye shrabon-gaane. Laaglo je dol boner maajhe Ange se mor dey dola je. Je baani oi dhaaner khete aakulo holo aankurete Aaj ei megher shyamol maayay Sei baani mor sure aane.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1929(১৩৩৬)
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