कोन् शुभखने उदिवे नय़ने
Kon shubhokhone udibe
पूजा
कोन् शुभखने उदिवे नय़ने अपरूप रूप-इन्दु
चित्तकुसुमे भरिय़ा उठिवे मधुमय़ रसविन्दु॥
नव नन्दनताने चिरवन्दनगाने
उৎसववीणा मन्दमधुर झङ्कृत हवे प्राणे–
निखिलेर पाने उथलि उठिवे उतला चेतनासिन्धु।
जागिय़ा रहिवे रात्रि निविड़मिलनदात्री,
मुखरिय़ा दिक चलिवे पथिक अमृतसभार यात्री–
गगने ध्वनिवे ‘नाथ नाथ वन्धु वन्धु वन्धु’॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Kon shubhokhane udibe nayone aporup rupo-indu Chityokusume bhoriya utthibe modhumoyo rasobindu. Nabo-nandanotaane chirobandanogaane Utsabobeena mondomodhuro jhonkrito hobe praane - Nikhiler paane utholi utthibe utala chetonasindhu. Jaagiya rohibe raatri nibiromilanodaatri, Mukhoriya dik cholibe pothik amritosabhaar jaatri - Gogone dhwonibe 'Naatho naatho bondhu bondhu bondhu'.
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 / कांगालिचरण सेन - रचनाकाल
- 1909(১৩১৬)
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