मोरे डाकि लय़े याओ
More daki loye jao
पूजा
मोरे डाकि लय़े याओ मुक्तद्वारे तोमार विश्वेर सभाते आजि ए मङ्गलप्रभाते॥ उदय़गिरि हते उच्चे कहो मोरे : तिमिर लय़ हल दीप्तिसागरे– स्वार्थ हते जागो, दैन्य हते जागो, सव जड़ता हते जागो जागो रे सतेज उन्नत शोभाते॥ वाहिर करो तव पथेर माझे, वरण करो मोरे तोमार काजे। निविड़ आवरण करो विमोचन, मुक्त करो सव तुच्छ शोचन, धौत करो मम मुग्ध लोचन तोमार उज्ज्वल शुभ्ररोचन नवीन निर्मल विभाते॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
More daaki loye jaao muktodwaare tomaro bishwero sabhate Aaji e mongaloprobhate. Udoyogiri hote uchche kaho more; timiro loy holo diptisaagore - Saartho hote jaago, doinyo hote jaago, sab jarotaa hote jaago jaago re Sotej unnato shobhate. Baahir karo tabo pather maajhe, baron karo more tomar kaaje. Nibir aaboran koro bimochan, mukto karo sab tuchchho shochan, Dhouto karo momo mugdho lochon tomar ujjwalo subhrorochan Nobino nirmalo bibhate.
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- कांगालिचरण सेन / दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1902(১৩০৯)
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