मुखपाने चेय़े देखि, भय़ हय़ मने
Mukhopane cheye dekhi
प्रेम
मुखपाने चेय़े देखि, भय़ हय़ मने– फिरेछ कि फेर नाइ वुझिव केमने॥ आसन दिय़ेछि पाति, मालिका रेखेछि गाँथि, विफल हल कि ताहा भावि खने खने॥ गोधूलिलगने पाखि फिरे आसे नीड़े, धाने भरा तरीखानि घाटे एसे भिड़े। आजो कि खोँजार शेषे फेर नि आपन देशे। विरामविहीन तृषा ज्वले कि नय़ने॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Mukhopaane cheye dekhi, bhay hoy mone – Phirechho ki phero naai bujhibo kemone. Aason diyechhi paati, maalika rekhechhi gnaathi, Biphal holo ki taaha bhaabi khane khane. Godhulilagone paakhi phire aase nire, Dhaane bhara torikhani ghaate ese bhire. Aajo ki khojar sheshe phero ni aapon deshe. Biramohin trisha jwale ki nayone.
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- अनादिकुमार दस्तिदारअनादिकुमार दस्तिदार1903–1974Singer and teacher, and one of the notable propagators of Rabindrasangeet.
- रचनाकाल
- 1927(১৩৩৪)
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