ना ना ना, सखी, भय় नेइ, भय় नेइ—
फुल यवे साङ्ग करे खेला
फल धरे सेइ ।
हर्ष-अचेतन वर्ष
रेखे याक मन्त्रस्पर्श
नवतर छन्दस्पन्दन ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Na na na sokhi, bhay nei, bhay nei –
Phul jabe sango kare khela
Phal dhare sei.
Harsho-achetan barsho
Rekhe jaak montrosparsho
Nabotaro chhandospandan.
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स्वरबितन १७ (चित्रन्गद)(স্বরবিতান ১৭ (চিত্রাঙ্গদা))
स्वरलिपि
शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
रचनाकाल
1936(১৩৪৩)
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