नाइ रस नाइ, दारुण दाहनवेला
Nai raso nai
प्रकृति
नाइ रस नाइ, दारुण दाहनवेला। खेलो खेलो तव नीरव भैरव
खेला॥
यदि झ’रे पड़े पड़ुक
पाता, म्लान हय़े याक माला गाँथा,
थाक् जनहीन पथे पथे मरीचिकाजाल फेला॥
शुष्क धुलाय़ खसे-पड़ा फुलदले घूर्णी-आँचल उड़ाओ आकाशतले।
प्राण यदि कर
मरुसम तवे ताइ होक– हे निर्मम,
तुमि एका आर आमि एका, कठोर मिलनमेला॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Naai raso nai, daruno daahonobela. Khelo khelo tabo nirabo bhoirabo khela. Jodi jhore pare poruk paata, mlaan hoye jaak maala gnaatha, Thaak janohin pathe pathe morichikajaal phela. Shushko dhulay khose-para phulodale ghurni aanchal urao aakastale. Praan jodi karo morusamo tabe taai hok hey nirmam, Tumi eka aar aami eka, kathor milanmela.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- प्रकृति · 10(প্রকৃতি)
- उप-पर्याय
- ग्रिस्म(গ্রিস্ম)
- राग
- मुल्तनि(মুলতানি)
- ताल
- कहर्व(কাহারবা)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- ऋतु
- ग्रीष्म(গ্রীষ্ম)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ३१(স্বরবিতান ৩১)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1925(১৩৩২)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।