নিভৃত প্রাণের দেবতা
Nibhrito praner debota
Puja
३००
निभृत प्राणेर देवता येखाने जागेन एका,
भक्त,
सेथाय़ खोलो द्वार– आज लव ताँर देखा॥
सारादिन
शुधु वाहिरे घुरे घुरे कारे चाहि रे,
सन्ध्यावेलार आरति हय़ नि आमार शेखा॥
तव जीवनेर आलोते जीवनप्रदीप ज्वालि
हे पूजारि, आज निभृते साजाव आमार थालि।
येथा
निखिलेर साधना पूजालोक करे रचना
सेथाय़ आमिओ धरिव एकटि ज्योतिर रेखा॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Nibhrito praaner debota jekhane jaagen eka, Bhakto, sethay kholo dwaar - aaj labo tnaar dekha. Saaradin shudhu baahire ghure ghure kaare chaahi re, Sondhabelar aroti hoy ni aamar shekha. Tabo jibaner aalote jibanoprodip jwaali Je pujari, aaj nibhrite saajbo aamar thaali. Jetha nikhiler saadhona pujalok kare rachona, Sethay aamiyo dhoribo ekti jyotir rekha.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Puja · 300(পূজা)
- उप-पर्याय
- Sadhak
- राग
- Purvi
- ताल
- Ektaal(একতাল)
- घराना
- Hindustani
- संकलन
- Geetanjali
- स्थान
- Shantiniketan
- स्वरबितान खण्ड
- 38
- स्वरलिपि
- Surendranath Bandopadhyay / Bhimrao Shastri
- रचनाकाल
- 1 January 1910(১৭ পৌষ ১৩১৬)
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