निविड़ मेघेर छाय़ाय़ मन दिय़ेछि मेले
Nibiro megher chhayay
प्रकृति
निविड़ मेघेर छाय़ाय़ मन दिय़ेछि मेले,
ओगो प्रवासिनी,
स्वपने तव
ताहार वारता कि पेले॥
आजि तरङ्गकल्लोले दक्षिणसिन्धुर त्रन्दनध्वनि
आने वहिय़ा काहार विरह॥
लुप्त तारार पथे चले काहार सुदूर स्मृति
निशीथरातेर
रागिणी वहि।
निद्राविहीन व्यथित हृदय़
व्यर्थ शून्ये ताकाय़े रहे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Nibiro megher chhaayay mono diyechhi mele, Ogo probasini, swapone tabo Taahar baarota ki pele. Aaji tarongokalokallole dokhhinosindhur krandondhwoni Aane bohiya kaaharo biraho. Lupto taararo pathe chale kaaharo suduro smriti Nisithoraater raagini bohi. Nidrabihin byathito hridayo Byartho shunye taakaye rahe.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1938(১৩৪৫)
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