ओइ मेघ करे वुझि गगने !
Oi megh kore bujhi
वाल्मीकि प्रतिभा Valmiki Pratibha से · दृश्य 1
ओइ मेघ करे वुझि गगने ! आँधार छाइल, रजनी आइल, घरे फिरे याव केमने ॥ चरण अवश हाय়, श्रान्त क्लान्त काय় सारा दिवस वन भ्रमणे । घरे फिरे यव केमने ॥ ए की ए घोर वन !— एनु कोथाय় ! पथ ये जानि ना, मोरे देखाय়े दे-ना ! की करि ए आँधार राते ! की हवे मोर हाय় ॥ घन घोर मेघ छेय়ेछे गगने, चकित चपला चमके सघने, एकेला वालिका तरासे काँपे काय় ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Oi megh kore bujhi gagone. Aandhar chhaailo, rajoni aailo, Ghore phire jaabo kemone ! Charon obash haay, shraanto klaanto kaay Saara dibas bono bhromone. Ghore phire jaabo kemone !
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1886(১২৯৩)
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