गीत / Prem

সখী, ওই বুঝি বাঁশি বাজে (ওই বুঝি বাঁশি বাজে)

Prem
सखी,     ओइ वुझि वाँशि
वाजे–   वनमाझे कि मनोमाझे॥

वसन्तवाय़  वहिछे कोथाय़,

कोथाय़ फुटेछे फुल,

वलो गो सजनि,     ए सुखरजनी

    कोन्खाने
उदिय़ाछे–
वनमाझे कि मनोमाझे॥

याव कि याव ना  मिछे ए भावना,

सखी,  मिछे मरि लोकलाजे।

के जाने कोथा से   विरहहुताशे

फिरे अभिसारसाजे–

वनमाझे कि मनोमाझे॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।

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