ओरे के रे एमन जागाय़ तोके (घुम केन नेइ)
Ore ke re emon jagay
पूजा
२१३
ओरे के रे एमन जागाय़ तोके?
घुम केन नेइ तोरइ चोखे?
चेय़े आछिस आपन-मने– ओइ ये दूरे गगन-कोणे
रात्रि मेले राङा नय़न रुद्रदेवेर दीप्तालोके॥
रक्तशतदलेर साजि
साजिय़े केन राखिस आजि?
कोन् साहसे एकेवारे शिकल खुले दिलि द्वारे–
जोड़हाते तुइ डाकिस कारे, प्रलय़ ये तोर घरे ढोके॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ore,ke re emon jaagay toke ? Ghum keno nei tori chokhe ? Cheye aachhis aapon-mone - oi je dure gagon kone Raatri mele raanga nayon rudrodeber diptaloke. Raktoshatodaler saaji Saajiye keno raakhis aaji ? Kon saahose ekebaare shikal khule dili dwaare - Jorhaate tui daakis kaare, prolay je tor ghare dhoke.
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- पर्याय
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- स्वरलिपि
- सुधीर चंद्र करसुधीर चंद्र कर1906–1977Rabindranath's personal scribe in his last years: when illness kept the poet from writing, he dictated and Sudhirchandra set it down.
- रचनाकाल
- 25 August 1914(৯ ভাদ্র ১৩২১)
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