पाखि आमार नीड़ेर पाखि
Pakhi amar nirer pakhi
प्रेम
२२ पाखि आमार नीड़ेर पाखि अधीर हल केन जानि– आकाश-कोणे याय़ शोना कि भोरेर आलोर कानाकानि॥ डाक उठेछे मेघे मेघे, अलस पाखा उठल जेगे– लागल तारे उदासी ओइ नील गगनेर परशखानि॥ आमार नीड़ेर पाखि एवार उधाओ हल आकाश-माझे। याय़ नि कारो सन्धाने से, याय़ नि ये से कोनो काजे। गानेर भरा उठल भरे, चाय़ दिते ताइ उजाड़ करे– नीरव गानेर सागर-माझे आपन प्राणेर सकल वाणी॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Paakhi aamar nirer paakhi adhir holo keno jaani - Aakash-kone jaay shona ki bhorer aalor kaanakaani. Daak uthechhe meghe meghe alos pakha utthlo jege - Laaglo taare udasi oi nil gagoner paroshkhaani. Aamar nirer paakhi aabar udhaao holo aakash-maaje Jaay ni karo sandhane se, jaay ni je se kono kaaje. Gaaner bhara uthlo bhore, chaay dite taai ujar kore - Nirab gaaner sagor-maaje aapon praaner sakol baani.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1918(১৩২৫)
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