पान्थ, एखनो केन अलसित अङ्ग
Pantho ekhano keno
पूजा
२७९
पान्थ, एखनो केन अलसित अङ्ग–
हेरो, पुष्पवने जागे विहङ्ग॥
गगन मगन नन्दन-आलोक उल्लासे,
लोके लोके उठे प्राणतरङ्ग॥
रुद्ध हृदय़कक्षे तिमिरे
केन आत्मसुखदुःखे शय़ान–
जागो जागो, चलो मङ्गलपथे
यात्रीदले मिलि लहो विश्वेर सङ्ग॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Paantho ekhono keno alosito ango - Hero puspobone jaage bihongo. Gagon magon nandano-aalok ullaase, Loke loke utthe praantarongo. Ruddho hridoyokokkho timire Keno aatmosukhduhkhe shayaan - Jaago jaago chalo mongalopathe Jaatridole mili laho biswer sango.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1897(১৩০৪)
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