फागुन-हाओय़ाय़ रङे रङे पागल झोरा लुकिय़े झरे
Phagun haway ronge
प्रकृति
फागुन-हाओय़ाय़ रङे रङे
पागल झोरा लुकिय़े झरे
गोलाप जवा पारुल पलाश
पारिजातेर वुकेर ’परे॥
सेइखाने मोर परानखानि यखन पारि वहे आनि,
निलाज-राङा पागल रङे रङिय़े निते थरे थरे॥
वाहिर हलेम व्याकुल
हाओय़ार उतल पथेर चिह्न धरे–
ओगो तुमि रङेर पागल,
धरव तोमाय़ केमन करे।
कोन् आड़ाले लुकिय़े रवे, तोमाय़ यदि ना पाइ तवे
रक्ते आमार तोमार पाय़ेर रङ लेगेछे किसेर तरे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Phagun-haaway range range paagol jhora lukiye jhare Golap jabaa parul palash paarijater buker pare. Seikhane mor parankhani jakhon paari bohe aani, Nilajo raanga paagol range rangiye nite thare thare. Baahir holem bakul haawar utal pather chinho dhare Ogo tumi ranger paagol, dhorbo tomay kemon kore. Kon aarale lukiye rabe, tomay jodi naa paai tabe Rakte aamar tomaar paayer rang legechhe kiser tare.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1918(১৩২৫)
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