फागुनेर नवीन आनन्दे
Phaguner nabin anande
प्रकृति
फागुनेर नवीन आनन्दे
गानखानि गाँथिलाम छन्दे॥
दिल तारे वनवीथि कोकिलेर कलगीति,
भरि दिल वकुलेर गन्धे॥
माधवीर मधुमय़ मन्त्र
रङे रङे राङालो दिगन्त।
वाणी मम निल तुलि पलाशेर कलिगुलि,
वेँधे दिल तव मणिवन्धे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Phagunero nobino aanonde Gaankhani gnaathilam chhande. Dilo taare bonobithi kokilero kalogiti, Bhori dilo bakuler gandhe. Maadhobiro modhumay montro Range range raangalo diganto. Baani mamo nilo tuli palashero koliguli, Bnedhe dilo tabo monibandhe.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 27 February 1926(১৫ ফাল্গুন ১৩৩২)
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