পোহালো পোহালো বিভাবরী
Pohalo pohalo bibhabori
Prakriti
पोहालो पोहालो विभावरी, पूर्वतोरणे शुनि वाँशरि॥ नाचे तरङ्ग, तरी अति चञ्चल, कम्पित अंशुककेतन-अञ्चल, पल्लवे पल्लवे पागल जागल आलसलालस पासरि॥ उदय़-अचलतल साजिल नन्दन, गगने गगने वने जागिल वन्दन, कनककिरणघन शोभन स्यन्दन–नामिछे शारदसुन्दरी। दशदिक-अङ्गने दिगङ्गनादल ध्वनिल शून्य भरि शङ्ख सुमङ्गल– चलो रे चलो चलो तरुणयात्रीदल तुलि नव मालतीमञ्जरी॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Pohalo pohalo bibhabori, Purbotorone shuni bnaashori. Naache tarongo, tori oti chanchalo, kampito onsukoketano-anchalo, Pallabe pallabe paagol jaaglo aalosolaloso paasori. Udayo-achalotalo saajilo nandano, gagone gagone bone jaagilo bandano, Kanokokiranoghano shobhan ssandano - naamichhe shaarodosundari. Dasodik-angone digongonadal dwonilo shunno bhori shankho sumangalo - Chalo re chalo chalo torunojaatridalo tuli nabo maalotimonjori.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Prakriti · 169(প্রকৃতি)
- उप-पर्याय
- Sharat
- राग
- Bhairav(ভৈরব)
- ताल
- Tritaal(ত্রিতাল)
- घराना
- Hindustani
- ऋतु
- Sharat(শরৎ)
- प्रकाशित
- Probasi
- स्वरबितान खण्ड
- 16 (Geetapanchashika)
- स्वरलिपि
- Dinendranath Tagore
- रचनाकाल
- 1915(১৩২২)
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