पथे चले येते येते
Pothe chole jete jete
पूजा
५७२
पथे चले येते येते कोथा कोन्खाने
तोमार परश आसे कखन के जाने॥
की अचेना कुसुमेर
गन्धे, की गोपन आपन आनन्दे,
कोन् पथिकेर कोन् गाने॥
सहसा दारुण
दुखतापे सकल भुवन यवे काँपे,
सकल पथेर घोचे चिह्न सकल वाँधन यवे छिन्न
मृत्यु-आघात लागे प्राणे–
तोमार परश आसे कखन के जाने॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Pathe chole jete jete kotha konkhane Tomar parosho aase kakhon ke jaane. Ki achena kusumero gondhe, ki gopano aapon aanonde, Kon pothiker kon gaane. Sahosa daarun dukkhotape sakol bhubono jobe knaape, Sakol pather ghoche chinno sakol bnaadhon jabe chhinno Mrittu-aaghat laage praane - Tomar parosh aase kakhone ke jaane.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 17 January 1928(৪ মাঘ ১৩৩৪)
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