प्रखर तपनतापे
Prokharo tapanotape
प्रकृति
प्रखर तपनतापे आकाश तृषाय़ काँपे,
वाय़ु करे हाहाकार।
दीर्घपथेर शेषे डाकि मन्दिरे एसे,
‘खोलो खोलो खोलो द्वार।’
वाहिर हय़ेछि कवे कार आहवानरवे,
एखनि मलिन हवे प्रभातेर फुलहार॥
वुके वाजे आशाहीना क्षीणमर्मर वीणा,
जानि ना के आछे किना, साड़ा तो ना पाइ तार।
आजि सारा दिन ध’रे प्राणे सुर ओठे भरे,
एकेला केमन क’रे वहिव गानेर भार॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Prokharo tapanotaape aakash trisaay knaape, Baayu kare haahakar. Dirghopather sheshe daaki mondire ese, 'Kholo kholo kholo dwaar.' Baahir hoyechhi kabe kaar aahwaanrabe, Ekhani molin habe probhater phulohaar. Buke baaje aashahina khinomarmar bina, Jaani na ke aachhe kina, saara to na paai taar. Aaji saara din dhore praane sure otthe bhore, Ekela kemon kore bohibo gaaner bhaar.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1922(১৩২৯)
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