प्रभात-आलोरे मोर काँदाय़े गेले
Probhat alore mor
प्रेम
प्रभात-आलोरे मोर काँदाय़े गेले मिलनमालार डोर छिँड़िय़ा फेले॥ पड़े या रहिल पिछे सव हय़े गेल मिछे, वसे आछि दूर-पाने नय़न मेले॥ एके एके धूलि हते कुड़ाय़े मरि ये फुल विदाय़पथे पड़िछे झरि। भावि नि रवे ना लेश से दिनेर अवशेष– काटिल फागुनवेला की खेला खेले॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Probhat- aalore mor knaadaye gele Milonomaalar dor chniriya phele. Pore ja rohile piche sob hoye gelo miche, Bose aachi dur-paane nayon mele. Eke eke dhuli hote kuraaye mori Je phul bidaypothe poriche jhori. Bhaabi ni rabe na lesh se diner aboshesh - Kaatilo phaagun bela ki khela khele.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1929(১৩৩৬)
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