प्रथम आलोर चरणध्वनि उठल वेजे येइ
Prothom alor charanodhwani
पूजा
३४२
प्रथम आलोर चरणध्वनि उठल वेजे येइ
नीड़विरागी हृदय़ आमार उधाओ हल सेइ॥
नील अतलेर कोथा थेके उदास तारे करल ये के
गोपनवासी सेइ उदासीर ठिक-ठिकाना नेइ॥
‘सुप्तिशय़न
आय़ छेड़े आय़’ जागे रे तार भाषा,
से वले ‘चल् आछे येथाय़ सागरपारेर वासा’।
देश-विदेशेर सकल धारा सेइखाने हय़ वाँधनहारा,
कोणेर प्रदीप मिलाय़ शिखा ज्योतिसमुद्रेइ॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Prothom aalor charondhonni utthutlo beje jei Nirbiraagi hriday aamar udhao holo sei. Nil atoler kotha theke udaas taare korlo je ke Gopanbaasi sei udaasir thik-thikana nei. 'Suptishayon aay chere aay' jaage je taar bhaasha, Se bale 'Chal aachhe jethay saagorpaarer baasa'. Desh-bidesher sakol dhaara seikhane hoi bnaadhonhaara Koner prodip milay shikha jotisomudrei.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 25 December 1922(১০ পৌষ ১৩২৯)
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